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“गीली मिट्टी” 2019

विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस के उपलक्ष्य में अनोखी मानव सेवा समिति के तत्वाधान में अनोखी कार्यशाला “गीली मिट्टी” का आयोजन किया गया l जिसका उद्देश्य बच्चो व बड़ो को मिट्टी की महत्वता, मिट्टी में क्यों खेलना, पर्यावरण क्या है और इसको क्यों बचाना चाहिए l शोध कहते है कि मिट्टी से खेलने से शरीर की बिमारियों से लड़ने की क्षमता बढती है l आज के इस युग में मोबाइल और कम्प्यूटर की वजह से हम हमारी पुरानी परम्पराओ को भूलते भी जा रहे है व प्रकृति से बच्चों का जुडाव कम होता जा रहा है l इस एक दिवसीय कार्यशाला में विभिन्न गतिविधि करवाई गई l कार्यशाला की संयोजक डॉ अनुरेखा ने बताया कि इसमे सबसे पहले पर्यावरण को लेकर विचार रखे गये फिर सीड बाल्स(मिट्टी की गेंद) बीजो को लेकर बनाई गई व उसको सुखाकर  बाद में यात्रा के दौरान खाली जगह परा फेका जायेगा l और मिट्टी की विभिन्न कलाकृति जैसे कि गणेशजी, चिड़िया बनाई गई और फिर पारम्परिक नृत्य कराया गया l डॉ उर्मिला तोमर , प्रीती बागडी, डॉ मनीषा मेहता , गुडीया सोनी , पंकज यादव , दीपेश भटनागर , जे. पी. चौहान और बच्चे उपस्थित थेl बच्चो ने अनोखी फार्मस पर पर्यावरण संबधित जानकारी के साथ मिट्टी के साथ खेल कर प्रकृति का आनन्द लिया l

आज ही अनोखी केयर के मेम्बर बने

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An Article on Menstrual Hygiene Day: By Anurekha Jain

महावारी और स्वच्छता

महावारी /मासिक कर्म एक प्राक्रतिक क्रिया है जिससे कि हर औरत को अपनी आधी जिंदगी में हर महिने गुजरना होता है

चूकि यह एक प्राक्रतिक क्रिया है फिर भी इसे मानव ने गंदा बना दिया है भारत वर्ष में मुख्यतः गांवों में तो इसे बहुत ही शर्मनाक तरीके से देखा जाता है। इसके बारे में जितना एक लड़की व महिला को जानना होता है उतना ही एक पुरूष को भी जानना चाहिये। महावारी की ही वजह से एक लड़की मां बनती है क्योंकि इस क्रिया की वजह से उसका शरीर मों बनने के लायक होता हौ अगर कोई लड़की को महावारी नहीं आती है तो वो मां नहीं बन सकती सोचो इस सृष्टि का निर्माण व आगे पृथ्वी पर बच्चो का आना महावारी पर आधारित है।

रिसर्च कहता है 28 प्रतिषत लड़किया स्कूल नहीं जाती है और वो महावारी के बारे में भी नहीं जानती है। 90 में से 6 महावारी के बारे में अनभिग्य होती हें। 90 में से 7 को अपनी पहली महावारी के बारे नहीं पता होतो है और सिर्फ 12 प्रतिषत लड़कियां इससे संबधित स्वच्छता को जानती हैं।

इस प्रमुख क्रिया को भी देष में लोग नहीं समझते है तो आइये आज अंतरष्टीय महावारी दिन के दिन इस लेख से जाने  क्योंकि आज भी सेनेटरी पेड बाजार में खरीदना शर्मनाक माना जाता है छिपाकर घर में रखा जाता है। इसके साथ कई सारे सामाजिक बंधन  है। और बहुत सारी काल्पीत कथाएं है और बहुत कम जाना जाता है।

एक लड़की को महावारी की शुरूआत के पहले षिक्षा दी जानी चाहिये। इस दौरान शारिरीक बदलाव, भावनात्मक बदलाव होता है उसको हर लड़की व महिला को जानना चाहिये। इस दौरान के विचारों में बदलाव, शारिरीक बदलाव होते है और उस बदलाव को महिलाओं को महसूस करना चाहिये।

म्हावारी को समझने के लिये शारीरिक व प्रजनन तंत्र को समझना बहुत जरूरी है व इसके पहले किषोरावस्था में जो लड़कियों में शारिरीक बदलाव आते है जो कि एक लड़की को मों बनने के लिये जरूरी है मतलब उसका शरीर एक बच्चां के जन्म देने के लिये तैयार होता है।

 यौवनवस्था के बदलाव-

1 आवाज बदल जाना

2 आंतरिक अंगो पर बालो का उगना

3 स्तन का बढ़ना

4 कमर का फैलना

5 महावारी की शुरूआत होना

6 पैरो के बालो का बढ़ना

7 त्वचा का तैलीय होने के कई बार चेहरे पर फुंसी का होना

शरीर रचना विज्ञान यन्त्र और मासिक चक्र

महावारी क्या है-

एक लड़की के पहले पिरियड को मासिक धर्म या रजोदर्षक कहा जाता है जोकि 8 और 19 वर्ष की आयु में शुरू होता है। आमतौर पर ये आयु ऐसे 13 वर्ष होती है।

प्राकृतिक क्रिया है और स्व्स्थ्य परिपक्व शरीर की निषानी हे। महावारी की क्रिया में रक्त, उतक जो कि गर्भाषय की अंदरूनी सतह बनाते ळे तो छोड़कर योनी के बाहर निकलता है और 2 से 7 दिनों तक बाहर आता है । ये चक्र बार-बार आता है 26 से30 दिन में कभी ये छोटा और कभी कभी बढ़ भी जाता हे। मासिक चर्क में चार चक्र होते है-

1 प्री-ओवुलेषन- जब अंडा अण्डाषय में परिपक्व होता है और गर्भाषय में आंतरिक पोषक सतह बनने लगती है ये जैसे ही महावारी बंद होती है उसके बाद शुरू होता है।

2.ओवुलेषन- जब एक परिपक्व अंडा अण्डाषय से फेलोपियन ट्युब के द्वारा चलता है और गर्भाषय में जाता है।

ये महावारी के 16 वे दिन तक चलता है। इस समय अगर कोई संभोग करता है तो गर्भावस्था होने की संभावना अत्याधिक होती है क्योंकि अंडा गर्भाषय में रहता और अगर स्पर्म मिल जाये तो निषेचन होता है और गर्भधारण होता है।

3. प्रीमेन्षुरेषन- जब अनिषेचित अंडा पोषक आंतरिक गर्भाषय की सतह गर्भाषय की दिवारों से अलग होने लगती हे ये 15 वां दिन होता है।

4.मेन्षुरेषन- महावारी जब आंतरिक सतह जोकि रक्त व उतक के बनी होती है योनि के द्वार से बाहर निकलती है एक से पांच दिन और कभी 6 दिन तक चलता है।

अंडा 28 घंटे तक गर्भाषय में जिन्दा रहता है और शुक्राणु (स्पम)र् 6 दिन तक जिन्दा रहते हे तो 14 से 16 दिन

तक एक लड़की माँ बन्ने की संभावना अत्यधिक होती हैं I

महावारी के बाद शरीर में होर्मोन बनते हैं वो फिर से दुसरे अंडे का परिपव व अंडाशय में बनने में मदद करते है व चक्र फिर से शुरू हो जाता हैं I

और अगर गर्भावस्था होती हैं तो अंडा स्पर्म के द्वारा निषेचित होता हैं और गर्भाशय की पोषित आतंरिक सतह में जम जाता हैं और बच्चे का रूप लेने लगता हैं इस दोरान महिला का मासिक धर्म बंद होजाता हैं जब तक की वो बच्चे को जन्म नही देती I इस तरह से मासिक धर्म दोहराती हैं हर महीने में और करीब 40 वर्ष की उम्र तक चलती हैं I अंदाजन 52 की उम्र में बंद होजाती हैं फिर एक महिला माँ नहीं बन सकती इस अवस्था को मीनोपॉज कहा जाता हैं I

साईकल ट्रैकिंग – बहुत ही शक्तिशाली टूल हैं जिसमे महावारी को अनुभव किया जा सकता हैं I साईकल ट्रैकिंग अगले पीरियड के लिए तेयार होने में मदद करती हैं पता कर सकते हैं की किस तारीख को अगला पीरियड आएगा I इससे ये भी पता चलता हैं कि कोनसा समय फर्टाइल हैं I 

२८ दिन का चक्र चार दिन का रक्तस्त्राव और 35 दिन का चक्र 6 दिन के रक्तस्त्राव के साथ महावारी का पहला दिन 1 को मानकर साईकल ट्रैकिंग करना चाहिए एक कैलेन्डर के उपर २९ और ३५ दिन के बिच साधारण माना जाता हैं कई बार लडकियों में ये इनसे ४५ दिन का भी होता हैं जो रक्त निकलता हैं उसकी मात्रा ९०-२९० मिली लीटर हर चक्र में होती हैं ओसतन ३० से ६० मिली लीटर होती हैं I

सामान्य महावारी के लक्षण – पेट में दर्द होना , स्तन का फूलना , कमर व पेरो का दुखना , महावारी के पहले श्वेत प्रदाय का होना , सर दर्द होना , मनोदशा में बदलाव होना , पेट में ऐठन आना I ज्यादातर लक्षण शरीर में हार्मोन के असर से होते हैं जो की महावारी चक्र को नियमित करते हैं I

चिकित्सक से परामर्श – जब एक लड़की की उम्र १६ से उपर हो और उसे महावरी की शुरुआत न हो –

1. -१३  वर्ष की आयु में भी स्तन न बने और अचानक से महावारी बंद हो जाये I

2. -७ दिन से ज्यादा महावारी चले I

३. -साईकल १९ दिन से कम भी व ४५ दिन से ज्यादा को होजये I

४. – 2 घंटे में ही नेपकिन घीला होजाए I

५. – बहुत ज्यादा शारीरिक दर्द हो I

6. – जब पीरियड एक या 2 दिन ही चले I

महावारी के दोरान योनी दुसरे स्त्राव भी छोडती है वाइट डिस्चार्ज तो सामान्य होता हैं पर चिकित्सा शेत्र से मदद ली जानी चाहिए जब –

1 अगर फ्लूइड का रंग हरा पिला या ग्रे हैं तो I

2 बदबू जेसे की मछली जेसी I

३ मेलालिक बदबू सामान्य होती हैं क्योंकि वो आयरन की वजह से होती हैं

४ पेशाब में जलन व खुजली होना

५ रेशेस  होना

व्यक्तिगत स्वछता

  • शरीर को साफ़ सुतरा रखना चाहिए
  • एक बार जरुर नहाये
  • आतंरिक अंगो की सफाई व अच्छे से धोना
  • योनी , अनस , मूत्राशय को धोकर अच्छे से सुखाना चाहिए
  • साफ़-सुतरे कपडे पहनना चाहिए
  • सूती आतंरिक कपडे पहनना चाहिए I

व्यायाम – इन दिनों व्यायाम करने को मन किया जाता हैं I परन्तु व्यायाम करना बहुत जरुरी हैं इससे ऑक्सीजन और ब्लड के फ्लो की जरुरत होती हैं I

पोषण – महावारी से रक्त की कमी हो सकती हैं एनीमिया से बचने के लिए आयरन का लेवल शरीर में बनाकर रखना चाहिए I

ऐसा भोजन खाना चाहिए जिसमे आयरन पूरी मात्रा में होना चाहिये जेसे की पलक , सुरजना की फली , गुड ,सूखे मेवे ,अल्सी ,तिल्ली ,दाले I

ऐसा भोजन जिसमे विटामिन C पूरी मात्रा में हो जेसे की नीबू ,चुना ,पपीता ,संतरा और जाम जो आयरन को अच्छे सोखता हैं I प्रोसेस फ़ूड नहीं खाना चाहिए मिठाई ,कोल्ड ड्रिंक I

खून की कमी से शरीर में थकान –

सास लेने में तकलीफ , धड़कन तेज़ होना , पेरो में चरमप आना , बालो का झड़ना I

महावारी के दोरान दर्द से केसे निजात पाए

  • हलकी मालिश करवाए
  • योग करे
  • हर्बल दावा का उपयोग करे जेसे कि मेथी दाना , अदरक I
  • गरम पानी की बोत्टेल से निकास करे I

योनी को स्वच्छ केसे रखे

  • योनी को साफ़ और सुखा रखे
  • अच्छा खाना , नींद और पानी पिए
  • सूती कपडे पहने
  • आगे से पीछे तक शरीर को साफ़ धोये
  • खुशबूदार पेड्स उपयोग न करे
  • खुसबूदार साबुन उपयोग में ना लेवे
  • चिकित्सक के अनुसार दवाई ले
  • अगर इन्फेक्शन हो तो हेम्पोन और कप उपयोग में न लेवे
  • लुब्रिकेंट और जेली उपयोग में न ले
  • कंडोम का उपयोग करे अगर नए साथी के सम्भोग करे
  • सम्भोग न करे जब महिला को इन्फेक्शन हो I

भावनात्मक परिवर्तन को समझे जेसे कि उदास हैं , दुखी हैं , चिडचिडापन या गुस्सा हैं ,खुश हैं ,बहार जा रहे हैं दोस्ताना व्यव्हार कर रहे हो I ये सभी परिवर्तन महावारी के दोरान होते हैं I तो अगली महावारी में आप को समझ में अजयग की अब पीरियड आने वाला हैं I

महावारी में उपयोग में लाने वाले उत्पाद –

1 कपडा – पहले के ज़माने में कपडा घडी करके उपयोग में लाया जाता था और इसे धोकर बार बार उपयोग में लाते थे आज भी गावो में उपयोग में लाया जाता हैं यह अगर अच्छी धुप में सुखाया जाये धोकर तो नुकसान नहीं हैं पर अगर गंदे स्थान पे रखा जाये और अगर अच्छे से नहीं धोयेंगे तो इन्फेक्शन हो सकता हैं I

इसके उपयोग से खर्चा नहीं आता हैं I

2. डिस्पोजेबल सेनिटरी पैड – बाजार में बहुत कंपनी के आते हैं ये प्लास्टिक के बने होते हैं इसमें रसायन होते हैं I कहते हैं कि यह एक साल तक ख़त्म नहीं हॉट हैं यह हर 6 घंटे में बदले जाते हैं I व फेके जाते हैं यह पर्यावरण को दूषित करते हैं अत्यधिक सफ़ेद होते हैं क्योंकि रसायन जेसे की उपयोग में लाया जाते हैं I

फ्युरोक्सिन और भी कई सारे इनकी प्रयोगशाला रिपोर्ट बताती हैं ये शरीर को नुकसान करते हैं यह केंसर भी करते हैं और पर्यावरण को दूषित करते हैं I

कुत्ते ओर गाये I

खाते है। इसको उपयोग करने के बाद कई लोग इनको मल या जमीन में गाड़तें हैं या जला देते है । कई लड़कियां तो शौचालय में डाल देती है तो शौचालय जाम हो जाता है।

एक महावारी के दौरान 12-14 पेड उपयोग में आते है तो ये खर्चीला साधन है।

3. Tampons – इनको योनी में डाला जाता है और रक्त को शोषित करते है। ये पलास्टिक के फाइबर के बने होते है। कारखानो में बनते है। ब्लीच रीयोन का बना होता है। ये भी एक उपयोग के बाद फेंका जाता हैं गाड़ा जाता है या जलाया भी जा सकता हे। 80 रू में 10 टेम्पोन आते है व एक महावारी में उपयोग में आते है। ये भी खर्चीला होता है इसमें पुराने लोग करते है लड़कियों का भ्लउमद टुट जाता है।

4. Menstrual Cup – सिलीकान के बने होते है ये भी योनि में डाले जाते है इसमें रक्त भरता है 30-40 मीली की क्षमता होती है । इसकी उम्र 10 साल की होती है धोकर बार बार उपयोग में लाया जाता है आखीरी उपयोग के बाद इसे उबाल कर रख देते है। ये पृथ्वी पर कचरा नही बढ़ाते है मात्र 400 रू से लेकर 1000 रू का एक आता है और 10 साल चलता है इसको उपयोग में लाने के लिये थोड़ी प्रक्टीस करनी पड़ती है। शुरू में अटपटा लगता है बाद में सरल हो जाता है बहुत पैसा बचता है इसमें भी हाईमेन टुटने लगता है। बहुत सी कम्पनी जैसे की बूद शी 2 स्टिक, एवरग्रीन आदि आते है।

5. कपडे के सेनेटरी पेड- कपडे के बने होते हे, बाजार के डिस्पोजेबल पद के आकार के होते हे इनमे बटन होते हे जो पेंटी से जुड़ जाते है I ये भी ८ से १० घंटे के बाद बदले जाते हैI धो कर धुप में सुखा कर फिर से उपयोग में लिए जाते है धोने के लिए ठन्डे पानी में गालाकर रखने से एकदम साफ़ हो जाते हैI

एक पैड ८ साल तक उपयोग में लाया जा सकता हैI गरीब ओरते इनको सिलाई करके बनती हे तो उनको रोजगार मिलता हैI इनके आखरी उपयोग के बाद यह पर्यावरण में जला कर नष्ट किये जा सकते है और पर्यावरण को बिलकुल नुक्सान नहीं पोहोचते हैI रसायन से मुक्त पर्यावरण अनुकूल, स्वास्थ्य वर्धक और कम खर्चीले होते हैI यह पैड ५० रुपये से ८० रुपये तक पड़ता है और ७५ वाशेस तक उपयोग में लाया जा सकता है

इसी तरह से बाज़ार के बहुत तरह के उत्पाद है हमें अच्छे से सभी के बारे में एनालिसिस करके उपयोग में लाना चाहिएI

इससे जुड़े सारे अन्धविश्वास को भी वैज्ञानिक तरीके से सोचना चाहिए हमने एक प्राकृतिक क्रिया का स्वरुप बिगाड दिया हेI इसे बहुत गन्दी निगाह से समाज में देखा जाता हैI

जबकि यह माना जाता है रक्त से स्त्रावित योनी एक कटा हुआ घाव होता है इसलिए एक औरत साक्रमित हो सकती है और हमने यह मानलिया की उसको चुने वाला व्यक्ति संक्रमित हो जाएगाI मंदीर न जाना, बहार नहीं जाना, व्यायाम न करना, आचार को हाथ नहीं लगाना, यह सभी मिथ को समझना व अपनी समझ के साथ मानना चाहिए यह एक बहुत ही सुन्दर प्रक्रिया है इसके दोरान एक युवती को अपने आप को सह्रीर से कनेक्ट करना चाहिए व् अच्छे से पड़ना चाहिएI तोह आए इस इंटरनेशनल मेन्स्त्रुअल डे पर इससे समभंदित सारे मिथ को हटाए और अच्छे उत्पाद को अपनी पसंद से उपयोग करे ९ और लोगो को जागरूक करेI

BYOC Concept @ By Dr Anurekha Jain

Bring your own container(BYOC) is a very nice old concept and it can reduce the use of single-use disposables. Now a day trend of organizing a party or event with the food is very common. Disposable glasses/plastic bottles are commonly used for the comfort zone of host and guest. We feel shame to bring a glass from the home to the party/event or organizers are also don’t want to say to their host to bring glasses/bottle.
But if we start to use BYOC concept then it will resolve the problem of single-use plastic eg. glass as well bottle.

So please start the BYOC concept for at least glasses without feeling shame..will save our environment as well as health..
Please think and implement…

Relearn……..Reduce…..reuse………

By: Dr Anurekha Jain

कम कपड़ों में धूप

सूरज की किरणें कहलाती है धूप
धूप से रखो गहरा नाता,
इसके बिना जीवन खराब हो जाता l

ये है हमारे आसपास प्रचुर
फिर भी हम इससे है दूर,
सुबह- सुबह की धूप निराली
कम कपडे में लेने से होती नहीं बीमारी l

जल-थल-हवा से बनी प्रक्रति
जिसका हम जी भर करते उपयोग,
तो फिर सूर्य की किरणों का भी क्यों करते नहीं उपभोग ?

विज्ञान कहता है यह है विटामिन D से भरपूर
तनाव, मधुमेंह, कैंसर को करें ये चकनाचूर l

एक सूर्य करता अन्धकार जगत का दूर,
सोचो धूप में कितनी ताकत है हुजुर ?

धूप से निकला पसीना
करे शरीर स्वच्छ-स्वस्थ,
फिर भी लगे हमें धूप से डर, चारदिवारी में हुये हैं बंद
ताकि ख़राब नाहो रूप-रंग।  

कम कपडे और ६० मिनिट की धूप
करदे तन-मन दुरुस्त,
तो खाओ धूप, न भागो दूर l

WRITTEN BY
Dr. Anurekha Jain 
Founder of Anokhi care

मेरा साधना फ़ॉरेस्ट का अविस्मरनीय अनुभव


साधना फ़ॉरेस्ट के नाम में ही उसका अर्थ छिपा हुआ हैं I जो की एक कड़ी साधना के बाद में बना हैं और यहाँ पर लोग साधना करने के लिए भी आते हैं I सबसे पहले में ये बताना चाहती हु की इजराइल के दम्पति अविराम रोजिन और उनकी पत्नी योरित ने भारत में चेतन मन और दिमाग के साथ दीर्घकालीन जीवनयापन को लेकर 70 एकड़ बंजर भूमि पर बिगत 14 साल में सतत सेवको की सहायता से साधना फ़ॉरेस्ट बनाया है I साधना फ़ॉरेस्ट पोंडिचेरी से 7 की.मी. दूर ओरेविल्ली के अन्दर हैं I हम भारत में होकर भी ये सोच नहीं पाये और उन्होंने कड़ी मेहनत करके 70 एकड़ धरती पर पानी के स्तर बढाने के लिए जंगल बनाया हैं जहा हम विकास को लेकर जंगल काट रहे हैं, कंक्रीट के घर बना रहे हैं, और नदी पर बाँध बना कर प्रकृति को नष्ट कर रहे हैं I भविष्य में अपने बच्चो के लिए पैसा जमा कर रहे हैं पर शुद्ध हवा, पानी और सनलाइट , पर्यावरण के बारे में नहीं सोच रहे हैं I इस समय मेरा मन उन दोनों को दिल से सलाम करता हैं कि बाहर के होकर उन्होंने भारत में जंगल विकसित किया हैं वो भी बंजर भूमि पर कितना कठिन काम हैं I इस लेख के माध्यम से में वहा की दिनचर्या ,साधना और स्थान के बारे में बताना चाहती हु I
घास व बम्बू की झोपडिया:- करीब उस जंगल के केन्द्रीय स्थान पर थोड़ी दुरी पर 22 झोपडिया बनी हुई हैं I वह सभी बॉस व् घास की बनी हुई हैं यहाँ पर कही पर भी प्लास्टिक व् सीमेंट का उपयोग नहीं किया गया हैं I झोपड़ियो का आर्किटेक्ट देखने लायक हैं I हवा और भरपूर प्रकाश को ध्यान में रख कर डिजाईन किया गया हैं I जो लोग 40 साल के ऊपर के आते हैं उनके लिए पर्सनल झोपडी हैं और कुछ बड़ी-बड़ी झोपडी जिसमे की एक साथ 50 लोग रह सकते हैं वो भी 2-2 मंजिल की हैं I जो निचे मंजिल हैं उसमे सोने के लिये लकड़ी की व रस्सी की झोपडी होती हैं साथ में मछर दानी लगी हुई होती हैं I कुछ बड़ी झोपडी जेसे की लाइब्रेरी , किचन ,स्टोर व मैडिटेशन झोपडी और केन्द्रीय झोपडी (मेन हट) जिसमे लंच , डिनर और ब्रेकफास्ट किया जाता है व सभी एक्टिविटीज इसी में होती हैं जो की ऑफिस व फ़ोन चार्जिंग, मीटिंग्स , इन्टरनेट जोन के लिए बनाई गई है I सभी लोग यहाँ पर एक साथ वर्कशॉप करते हैं व साथ में ब्रेकफास्ट , लंच एन्जॉय करते हैं I कोई भी अनाउन्समेंट और इनफार्मेशन भी यही पर शेयर की जाती हैं सभी हट्स का आर्किटेक्ट देखने लायक हैं I
किचन – यहाँ पर दूध को भी नॉन वेज माना जाता हैं I यहाँ ओरगेनिक रॉ फ़ूड आता हैं कम से कम तेल में और कम मसाले में साथ ही फ्रूट और वेजिटेबल जादा मात्रा में सर्व किया जाता हैं I
ब्रेकफास्ट , लंच और डिनर के लिए भी सेवक अपनी इच्छा से जिम्मेदारी लेते हैं जिसकी भी लिस्ट मैंन हट में लगा दी जाती हैं अलग-अलग देश के सेवक अपने मन से ये ड्यूटी लेते हैं व टीम बना कर भोजन बनाते हैं I जिससे आपको हर देश का खाना खाने को मिलता हैं बहुत ही सफाई के साथ सिगड़ी पर व चूल्हे पर खाना बनाया जाता हैं और सभी को बड़े सभ्य तरीके से और सफाई के साथ भोजन सर्व किया जाता हैं I यहाँ लकड़ी भी अलग तरीके से सेवको द्वारा काटी जाती हैं I जब कोई भी मेहनत करके खाना खाता हैं तो उसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता हैं I यहाँ खाने के पहले भरपूर मेहनत करवाई जाती हैं I
प्रकाश :- यहाँ पर इलेक्ट्रिक लाइट को उपयोग में नहीं लाइ जाती हैं सिर्फ सोलर लाइट का ही उपयोग किया जाता हैं और इसका समय भी तय रहता हैं ये सिर्फ शाम को 6 बजे बाद वो भी मुख्य झोपडी में होती हैं बाकी सभी जगह अँधेरा होता हैं I आपको अपनी टौर्च के सहारे ही सारे काम करना होते हैं I
फ़ोन चार्जिंग:- फ़ोन चार्जिंग का भी समय भी तय हैं दिन में 12 बजे से 5 वो भी सोलर लाइट की मदद से I वहा कई बार साइकिल की मदद से बिजली को पैदा किया जाता हैं जिससे की ग्राइंडर जेसी मशीनों को चलाया जा सके I
इंटरनेट:- यहाँ कही भी वाई-फाई जोन नहीं हैं क्योंकि रेडिएशन शरीर को व प्रकृति को नुकसान करती हैं इसलिए मैंन हट में छोटा सा वाई-फाई जोन इंटरनेट सर्फिंग के लिए बनाया गया हैं I (यहाँ कही दर्पण भी नहीं लगाया गया हैं I सिर्फ मैंन हट के ऑफिस में ही लगा हुआ हैं I वहा रहने वाला व्यक्ति प्रकृति के साथ व फिसिकल एक्टिविटी के साथ इतना घुल मिल जाता हैं की उसे अपनी शक्ल देखने की भी इच्छा नहीं होती I एक तरह से वैराग्य की भावना आती हैं जेसे की हम मंदिर में सोचते हैं वही एहसास हमे साधना फ़ॉरेस्ट में आता हैं I
बर्तन साफ़ करना:- रसोई के सभी बर्तन रसोई के टीम के सदस्य साफ़ करते है व रसोई की भी सफाई करते हैं I सभी बर्तन राख से साफ़ किये जाते हैं I वहा पर कोई भी रसायन उपयोग नहीं किया जाता हैं I सभी लोग वहा भोजन करके अपनी प्लेट खुद ही साफ़ करते हैं I साफ़ करने से पहले उसका कचरा अलग बर्तन जेसे गाये के खाने के बर्तन को खाद बनाने के कम्पोस्ट वाले बर्तन में डाला जाता हैं और जो दोनों काम नहीं आता हैं उसको भी अलग किया जाता हैं फिर बर्तन को राख से साफ़ करके पानी से अलग अलग बर्तन में डूबा कर धोया जाता हैं I इससे पानी की बचत होती हैं इसके लिए नल भी नही लगया गया हैं पानी को बचाने के लिए पूरा ध्यान रखा जाता हैं I
हाथ धोना :- हाथ धोने के लिए भी नल का उपयोग प्रतिबंधित हैं एक कोठी में पानी भर कर रखा जाता हैं उसमे मग होता हैं और एक मग को छेद करके डंडे से स्टैंड पर टांग दिया जाता हैं I और छेद वाली मग से छेद वाले मग में भर दिया जाता हैं और छेद वाले मग की धार से हाथ व पैर को धोया जाता हैं I
नहाना :- नहाने के लिए रहने की झोपडी से दूर नहाने के लिए ब्लाक बने हैं वह पर बाल्टी से पानी भर कर लाया जाता हैं साबुन का उपयोग नहीं किया जाता हैं ताकि कोई भी रसायन उस जगह को व पोधो को हानि ना पहुचाये साबुन वही से दिया जाता हैं जो की रसायन मुक्त होता हैं I
कम्पोस्टिंग :- वहा का कचरा खाने का हो या जंगल का उससे खाद बनाया जाता हैं जंगल में सेवको द्वारा गड्डा एक स्पेसिफिक साइज़ का खोदा जाता हैं व कचरे की परत बना कर साथ में मिटटी दाल कर उसको भर कर रखा जाता हैं व खाद बनाते हैं I
पखाना / पेशाब पर प्रयोग :- टॉयलेट में मूत्र के लिए अलग-अलग पोट होता हैं उसमे मूत्र को एकत्रित किया जाता हैं व जंगल में पेड़ो पर डाला जाता हैं जो की नाइट्रोजन प्लांट को देता हैं I वहा पर मूत्र को मल के पोट में नहीं भर सकते हैं उसके लिए एक अलग पोट होता हैं उसी तरह लेट्रिन के लिए अलग होल होता हैं उसमे मूत्र नहीं कर सकते हैं लेट्रिन करने में सा-डस्ट का उपयोग होता हैं I लेट्रिन में जाने के बाद सा-डस्ट डालना होता हैं व वाश के लिए अलग पोट पर जाना होता हैं मल के साथ मूत्र को मिक्स नहीं होने दिया जाता हैं मल को भी साफ़ डस्ट के साथ मिलाकर रख कर जब मात्रा में एकत्रित हो जाता हैं तो उसको धुप में सुखाने के लिए देते हैं और व खाद बन जाता हैं और वहा पर पू और पी पर बहुत प्रयोग होता हैं जंगल में कही भी फ़ूड के पेड़ नहीं हैं क्यूंकि फ़ूड के प्लांट जादा पानी मांगते हैं सभी जंगली पेड़ हैं I मानव पेशाब व मल से भी खाद बनाकर उसे जंगल के पेड़ो के लिए उपयोग में लाया जाता हैं I
मड बाथ :- एक बड़ा तालाब मड से नहाने के लिए बनाया गया हैं वहा पर सभी वोलिन्टर इसमें नहाते हैं व आस पास की कम्युनिटी के बच्चे यहाँ पर नहाते हैं I
टायर का गार्डन :- बच्चो के खेलने के लिए वेस्ट टायर का गार्डन बना हुआ हैं जिससे हाथी , झुला ,सीडिया ,ड्रैगन बेठने के लिए बनाया गया हैं I
मोर्निंग सर्किल :- सुबह 5 बजे एक व्यक्ति चलकर म्यूजिक से अलार्म बजता हैं सबको उठकर फ्रेश होकर एक मैदान में एकत्रित होना होता हैं I वहा पर मोर्निंग की स्ट्रेचिंग और एक दुसरे से गले मिलना होता हैं फिर सेवा का पूछा जाता हैं किसको कोनसी सेवा करनी हैं I सेवा जेसे की ब्रेकफास्ट बनाना , डिनर बनाना , लंच बनाना , कैंपस में पानी भरना , कैंपस की सफाई , कम्पोस्ट के लिए गड्डे खोदना ,लकड़ी काटना , पोधे लगाना , इसको तीन भागो में बाट कर सुबह 6-8:30 की सेवा फिर नाश्ता करना Iनाश्ते के बाद फिर सेवा और फिर स्वादिष्ट लंच और इसके बाद जिसे सेवा करनी है वो और सेवा कर सकता हैं सेवक अपनी पसंद से सेवा चयन करता हैं व ग्रुप बना कर काम करता हैं I
विदेशी लोग अपनी सेवा देने बहुत आते हैं शाम को कल्चरल इवनिंग होती हैं अलग अलग दिन अलग I कभी कभी टैलेंट शो , शेयरिंग सर्किल , मूवीज शो होता हैं सप्ताह के दो दिन शनिवार और रविवार सेवा से छुट्टी होती हैं Iयहाँ पर साइकिल व लूना किराये पर मिलती हैं जिसे लेकर ऐरोविल पास में हे जिसपे जाया जा सकता हैं I
बेस्ट आउट ऑफ़ वेस्ट सेंटर:- बेस्ट आउट ऑफ़ वेस्ट वाले काम के लिए भी एक सेंटर हैं जहा पर सभी वर्क मटेरियल रखा होता हैं जिस किसी भी सेवक को कुछ बनाने का मन हो तो वो सेवा के समय को छोड़कर बना सकते हैं I
पुस्तकालय :- यहाँ बहुत बड़ी एक हट है जिसमे पुस्तकालय हैं और गिफ्ट कल्चर की सिस्टम से बहुत सा सामान जेसे की कपडे ,वूलेन ,चप्पल भी हैं कोई भी कपडे ले सकता हैं व कोई भी अपना सामान उस जगह पे रख कर आ सकता हैं I पुस्तकालय भी लोगो ने गिफ्ट से ही बनाया हैं कोई भी किताब वह पढने के बाद लाइब्रेरी में छोड़ कर आ सकता हैं I
सभी लोग पहले तो अनजान होते हैं पर थोड़ी सी ही देर में एक दुसरे से मिक्स होजाते हैं व मिल कर काम करते हैं 40 से ऊपर उम्र वाले के लिए सेवा अनिवार्य नहीं हैं पर इससे कम उम्र वालो क लिए सेवा जरुरी हैं I जो भी वहा आता हैं वह प्रकृति के बिच में मस्त होजाता हैं फिजिकल एक्टिविटी करने के बाद अच्छी नींद , अच्छी भूख न्यूट्रीशियन फ़ूड , शुद्ध पानी , हवा व्यक्ति को स्वस्थ व स्फूर्तिदायक बनाती हैं I यह बेहद ही सुन्दर जगह हैं I
पोधे को लगाना :- जंगल के पेड़ भी जमीं पर अलग तरीके से लगाये हैं 70 एकड़ की जमीं पर बंजर थी उस पर पेड़ लगाना व पानी डालना , चलाना इतना आसान नहीं था I पर बहुत से प्रयोग के बाद पोधे को 2 तरीके से लगाया जाता हैं पोधे भी गिफ्ट कल्चर से आते हैं दूर पानी केसे डाला जाये उसके लिए भी तकनीके हैं बिसलेरी की बोतल को पोधे के साथ पानी भर कर छेद करके रस्सी डाल कर रखा जाता हैं ताकि वो धीरे – धीरे पानी बोतल से निकलता हैं व पोधे को पानी मिलता हैं पहले वाले पोधे गड्डा खोद कर लगाये गए हैं वो प्लास्टिक की होलो कोठी को रख कर लगाया जाता हैं ताकि गड्डा भी न खोदना पड़े I
जो भी व्यक्ति वहा देखने आते हैं वो इस जगह की सेवा , सेवा भाव से करते हैं I उसी सेवा से आज वह जंगल फ़ैल चूका हैं आज आदमी जंगल काटने में लगा हैं ऐसे में अगर साधना फ़ॉरेस्ट में रहकर जो आ जायेगा तो निश्चित हे वह व्यक्ति की सोच में बदलाव लाता हैं I साधना फ़ॉरेस्ट में बीमारी ठीक हो जाती हैं I व्यक्ति स्वस्थ्य रहता है व पृथ्वी का पर्यावरण भी नहीं बिगड़ता हैं I
भारत में व भारत के बाहर इस तरह की कई जगह बन रही हैं I और आपको इनसे जुड़ने की व इसमें रहने की आवश्यकता हैं क्योंकि विकास की वजह से हमारी दिनचर्या में बहुत परिवर्तन हुआ हैं I प्रकृति हमसे दूर होती जा रही हैं शारीरिक क्रिया कम और हमारी आयु कम होती जा रही हैं अगर हमको अपनी आयु बढ़ाना है और स्वस्थ्य रखना है तो ऐसी जगहों पर रहना होगा I

डॉ. अनुरेखा जैन
( संस्थापक अनोखी केयर )